भारत की हार के बाद बीफ़ से जुड़े लिखे दो साल पुराने फ़ेसबुक पोस्ट पर एफ़आईआरः प्रेस रिव्यू

  • 15 अगस्त 2019
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असम पुलिस ने बुधवार को गुवाहाटी यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च स्कॉलर रेहाना सुल्तान पर एफ़आईआर दर्ज की है.

द टेलीग्राफ़ के मुताबिक़ रेहाना ने 2017 में एक फ़ेसबुक पोस्ट किया था और उसे शेयर करने के तुरंत बाद उसे डिलीट भी कर दिया था, लेकिन दो साल बाद वह पोस्ट एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आ गया.

सुल्ताना ने फ़ेसबुक पर असमिया में लिखा था, "आज मैं गोमांस खाकर पाकिस्तान की ख़ुशी में शरीक हुई. जो मैं खाती हूं वो मुझे पसंद है. बीफ़ शब्द पढ़ कर कृपया षड्यंत्र शुरू नहीं करें."

कामरूप ज़िले के बोको की रहने वाली रेहाना ने यह पोस्ट 2017 के चैंपियंस ट्रॉफ़ी में पाकिस्तान की भारत पर जीत के बाद लिखी थी.

10वीं-12वीं का वार्षिक परीक्षा शुल्क नहीं

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली सरकार सभी श्रेणियों के छात्रों के परीक्षा शुल्क का पूरा ख़र्च उठाने की तैयारी कर रही है.

उनके मुताबिक़ अगर ऐसा होता है तो दिल्ली के सरकार और सहायता प्राप्त स्कूलों के 10वीं और 12वीं के छात्रों को वार्षिक परीक्षा शुल्क नहीं देना पड़ेगा. दरअसल, 10वीं और 12वीं के सामान्य वर्ग के सीबीएसई छत्रों को शुल्क में वृद्धि के बाद अब 1500 रुपये देने हैं.

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विधायक से दंगे के आरोप हटवाएगी यूपी सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के अभियुक्त और भारतीय जनता पार्टी के विधायकों और सांसद से मुक़दमा वापस लेने की तैयारी कर रही है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ विधायक संगीत सोम और सुरेश राणा और सांसद संजीव बालियान भी दंगों के अभियुक्तों में शामिल हैं.

बीजेपी के इन नेताओं से मुक़दमे वापस लेने के लिए यूपी सरकार विधायक/सांसद विशेष अदालत जा सकती है. सरकार दंगों के क़रीब पांच दर्जन अभियुक्तों से मुक़दमे वापस लेने की कार्रवाई पहले ही शुरू कर चुकी है. दावा है कि बीजेपी नेताओं पर दर्ज मुक़दमे राजनीति से प्रेरित थे.

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थोक महंगाई 25 महीने के सबसे निचले स्तर पर

इस ख़बर को अख़बार अमर उजाला ने अपने पहले पन्ने पर छापा है. वो लिखता है कि थोक महंगाई लगातार तीसरे महीने घटकर जुलाई में 1.08 फ़ीसदी रह गई है जो 25 महीने का सबसे निचला स्तर है.

अख़बार लिखता है कि इसकी वजह खाद्य पदार्थों, ईंधन और विनिर्मित सामानों की क़ीमतों में कमी बताई जा रही है.

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